महापर्व छठ: पूजन सामग्री से पटा बाजार, महंगाई ने बढ़ाई बाजार की रौनक और बेचैनी दोनों!
जिले में महापर्व छठ को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच रहा है। एक तरफ घाटों की साफ-सफाई हो रही है। वहीं दूसरी ओर पूजन सामग्री से बाजार पटा पड़ा है। छठ पूजा की विभिन्न सामग्री की मौसमी दुकानों से शिवहर बाजार सज गया है। शहर के पटेल चौक, ब्रह्म स्थान चौक रोड, सब्जी बाजार जाने वाली सड़क, गांधी चौक तक की सड़क के साथ-साथ हरेक चौक चौराहे पर छठ पर्व को लेकर पूजन सामग्री की दुकानें सजी है। सूप, डाला, फल की दुकानों से बाजार गुलजार हो रहा है। इन दुकानों में जोड़ा बिका। ग्राहक को मजबूर होकर खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है। यहां बाजार में शनिवार को

सूप –300 ऊंचे दाग पर सूप खरीदना पड़ रहा है। वहीं नारियल 120 जोड़ा, डावा नींबू 80 जोड़ा में बेची जा रही है। अन्य फलों में नारंगी 80 से 100 किलो, सेव 120 से 130 किलो, नाशपाती 120 किलो, शरीफा 140 किलो, केला 40 दर्जन, मौसमी 110 किलो, अनार 180 किलो के हिसाब सेर बिक रहा है। दुकानदारों ने बताया कि एक सूप का पूजन सामग्री 10 की पुड़िया बनाकर बेच रहे है। लोग सूप के हिसाब से पूजा सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं।

- सूप – 300रूपये
- नारियल –120 रुपए जोड़ा
- ढाबा नींबू –80 रुपए जोड़ा
- नारंगी – 80 से 100 रुपए किलो
- सेव – 120 से 130 रुपए किलो
- नाशपाती –120 रुपए किलो
- शरीफा –140 रुपए किलो
- केला – 40 रुपए दर्जन
- मौसमी – 110 रुपए किलो
- अनार – 180 रुपए किलो
- सूप का पूजन सामग्री – 10 की पुड़िया

लोग सूप के हिसाब से पूजा सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं।

मिट्टी का चूल्हा 80 से 100 रुपए में बिक रहा
वहीं बाजार में मिट्टी का चूल्हा भी बिक रहा है। छठ का प्रसाद शुद्ध व सात्विक तरीके से बनाया जाता है। प्रसाद को मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाने की परंपरा है। छठ का प्रसाद सिर्फ उसी चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर ही बनाया जाता है। यहां पर 80 से सौ रुपए में मिट्टी का चूल्हा बिक रहा है। मान्यता है कि नए चूल्हे पर बनाया गया प्रसाद छठी मैया को अधिक प्रिय होता है। मिट्टी के चूल्हे का उपयोग प्रकृति से हमारे जुड़ाव को दर्शाता है। मिट्टी के चूल्हे पर पकाया गया भोजन अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के अलावा स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय महापर्व, लोगों की आस्था से है जुड़ा
जिले में लोक आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ प्रारंभ हो गया है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाले इस चार दिवसीय पर्व के पहले दिन नहाय-खाय के साथ संकल्प लिया। सुबह होते ही नदी घाटो पर छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ रही। व्रतियों ने अहले सुबह पवित्र नदी में स्नान-ध्यान कर सूर्य देवता को नमन किया और घर लौटकर पवित्रता के साथ प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद में अरवा चावल, सेंधा नमक से बनी चने की दाल, लौकी की सब्जी और
आंवला की चटनी को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर व्रतियों ने इस महाअनुष्ठान की शुरुआत की। छठ व्रतियों ने बताया कि यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि प्रकृति, जल, सूर्य और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है। खास बात यह है कि इस अनुष्ठान में किसी पंडित या मंत्रोच्चारण की आवश्यकता नहीं होती। इसे लोक परंपरा और आत्मिक शुद्धता का पर्व माना जाता है। व्रतियों ने बताया कि रविवार को खरना का आयोजन होगा, जिसके बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगीं।



