माता के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता कोई

माता के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता कोई
📍 सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर हाईवे स्थित खनुआघाट के पास श्री सिद्धपीठ अघोर आश्रम, डकरामा।
यहां आस्था का ऐसा अनूठा केंद्र है, जहां हर मन्नत पूरी होने की मान्यता है। कहते हैं यहां माता के दर्शन मात्र से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं और मुरादें पूरी होती हैं।
✨ आश्रम से जुड़ी कई चमत्कारिक कथाएं भी प्रचलित हैं—कहा जाता है कि यहां लाए गए मुर्दे तक जीवन पा चुके हैं।
हर साल चारों नवरात्रों पर यहां भव्य आयोजन होता है। महानवमी के दिन विशेष हवन और भंडारे में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता है कि इस हवन में भाग लेने से नि:संतान दंपति को संतान सुख प्राप्त होता है।
यहां मां दुर्गा, दक्षिण काली और बगलामुखी भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। भक्तों का मानना है कि माता हर समय यहां विराजमान रहती हैं।
आश्रम की स्थापना पूर्व बैंक अधिकारी स्वामी शिवजी सिंह ने की थी। कठिन तपस्या और शक्ति साधना से अलौकिक शक्तियां प्राप्त कर उन्होंने नौकरी त्याग दी और लोककल्याण में जुट गए।
स्वामी शिवजी सिंह आज भी साल के चारों नवरात्र बिना अन्न-जल ग्रहण किए साधना करते हैं। कहा जाता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं दक्षिण काली माता ने उन्हें दर्शन और आशीर्वाद दिया।
चार मानव खोपड़ियों पर निर्मित यह अघोर आश्रम आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्धि और साधना का प्रतीक है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत कई बड़े नेता, न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मत्था टेक चुके हैं।
👉 डकरामा का यह सिद्धपीठ सचमुच आस्था, सिद्धि और शक्ति का जीवंत केंद्र है।
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